क्या लिखूँ, क्या बताऊ, कुछ समझ नहीं आता जब नजरें जाती उन मासूम बच्चों पर जो पढ़ना तो चाहते हैं पर पढ़ नहीं पाते इन ज़ालिम पैसो कि वजह से.. जब देखता हु उनको सुनसान सड़को पर हाथ मे कटोरा भीख मांगते हुये, मानो कतरा - कतरा हो जाता हु.. उनमे हैं वो सारे गुण जो होते हैं एक विधार्थी मे , बस दोष हैं तो उन पैसो का.. क्या समा जाएगी इनकी प्रतिभा इन ज़ालिम पैसो कि वजह से क्या इन पैसो के नीचे इनकी प्रतिभा मायने नहीं रखती .. सड़को पर भटकते हुये मांगे वो दो पैसे तो मना ना करना ये इंसानों. किसी पता वो पेन कि रिफिल के लिये मांग रहा हो या फिर पुस्तक के लिये या फिर प्राकृतिक क्षुधा को मिटाने के लिये मांग रहा हो. . तंबाकू, बीड़ी, मादक पदार्थ या जिओ (sim) का सेवन करने वाले को क्या फर्क पड़ता दो पैसो का. देवी और सज्जनों जिस प्रकार आप अपने बच्चों के लिये बड़े - बड़े सपने देखते हैं कि हमारा बेटा / बेटी बड़े होकर अफसर बनेंगे लेकिन इनके लिये सपने देखने बाला कोई नहीं हैं वो अनाथ है, दीन है . जब मे इन मासूम बच्चों को सड़को पर भीख मांगते हुये देखता हु तो मानो कतर...
बहुत पुरानी बात है एक शहर में एक बिज़नेस का परिवार निवास करता था . बिज़नेस मेन का नाम दशरथ सिंह था उसकी धर्मपत्नी का नाम सुशीला बाई तथा उसके दो बच्चे एक लड़का - एक लड़की , लड़के का नाम राम तथा लड़की का नाम राधा था लड़के की उम्र करीव बारह वर्ष तथा लड़की की उम्र आठ वर्ष थी .. दशरथ और उसकी पत्नी सुशीला बहुत सरल स्वाभाव , बहुत दयालु थे . उन लोगो के पास पैसो की कमी नहीं थी बहुत धनवान थे उनके बच्चे बहुत बड़े स्कूल में पढ़ाई करते थे . अचानक उनके घर पर आठ -दस भिक्षुक लोग आ गये . दशरथ ने पूछा आप लोग कोन है उन्होंने कहा हम भिक्षुक है आप से दक्षिणा लेने आये है हम यहाँ सभी से हर वर्ष दक्षिणा लेने आते है आपका ही घर बाकि था . दशरथ और उसकी पत्नी ने कहा गुरुदेव आप लोग बैठिये हम आपकी दक्षिणा का प्रबंध करते है . दशरथ ने कहा आप सभी लोग भोजन ग्रहण कर ही जावें , में आपकी कुछ क्षणों में भोजन बनबाता हु . दोनों पति -पत्नी बहुत सारे पकवान बना दिये बहुत खाना बना लिया और प्रेम से खाना खिलाया . खाना खाने के बाद भिक्षुक बोले अब हम चलते है , हमें हमारी दक्षिणा से कही ज्यादा मिल गया दशरथ बोला नहीं गु...
Nice
जवाब देंहटाएं